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अस्थिर ब्याज क्या है?

अस्थिर ब्याज क्या है?
क्या है डिबेंचर?
डिबेंचर इक्विटी शेयरों से भिन्न, एक तरह का ऋण का साधन है। इसके माध्यम अस्थिर ब्याज क्या है? से सरकार या कंपनियां धन जुटाती हैं। डिबेंचर खरीदने वाला वास्तव में कर्जदाता होता है। डिबेंचर जारी करने वाली कंपनी गिरवी के तौर पर कुछ नहीं रखती, लेकिन खरीदार उनकी साख और प्रतिष्ठा को देखते हुए डिबेंचर खरीदते हैं। डिबेंचर जारी करने वाली कंपनी या संस्थान कर्जदाताओं (डिबेंचर खरीदने वालों को) निश्चित ब्याज देते हैं।

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अस्थिरता के कारण क्या आपको शेयरों में निवेश से बचना चाहिए?

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जब अस्थिर ब्याज क्या है? मनीषा की मां जोखिम के बारे में चिंतित होती हैं तो वह वास्तव में पैसे डूब जाने को लेकर सोचती हैं. वहीं, दूसरी ओर अस्थिरता का मतलब है कि निवेश का मूल्य कितनी जल्दी और कैसे बदल जाता है.

इस हिसाब से तो पीपीएफ और ऐसे दूसरे निवेश भी अस्थिर हैं जिनमें ब्याज मिलता है. कारण है कि ब्याज दरों में बदलाव के साथ रिटर्न बदल जाता है. पीपीएफ की दरें एक जैसी नहीं रहती हैं. बैंक भी अपने फिक्स्ड डिपॉजिट की दरों को बदलते हैं.

इक्विटी के मूल्य नियमित रूप से तेजी के साथ बदलते हैं. चूंकि मूल्य में तेज उतार-चढ़ाव होता है, इसका मतलब यह नहीं है कि पैसा डूब जाने का जोखिम है. अस्थिरता का सिर्फ मतलब है, मूल्यों का घटना-बढ़ना. कुछ निवेश ज्यादा अस्थिर हो सकते हैं तो कुछ में यह अस्थिरता कम हो सकती है.

आरबीआई ने 4 साल में पहली बार ब्याज दर बढ़ाई, Home Loan समेत जानिए क्या-क्या महंगा होगा

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RBI Interest Rate : रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों में किया इजाफा

repo rate 2022 : रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति खासकर खाद्य पदार्थों की बढ़ती महंगाई को देखते हुए चार साल में पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है. आसार हैं कि बैंक जल्द ही अपनी कर्ज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं, जिससे होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी. आरबीआई ने रेपो रेट को 4 से 4.40 फीसदी कर दिया है. जबकि कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) को 4.5 से बढ़ाकर 5 फीसदी कर दिया है. आरबीआई ने यह अपनी निश्चित समायंतराल पर की जाने वाली मौद्रिक समीक्षा नीति से अलग हटकर अचानक यह बढ़ोतरी की है. केंद्रीय बैंक का अचानक उठाया गया ये कदम बाजार के लिए चौंकाने वाला रहा. हालांकि महंगाई के ऊंचे स्तर को देखते हुए पिछली 2-3 मौद्रिक समीक्षा के दौरान ब्याज दरों में बढ़ोतरी के आसार लगाए जा रहे थे, हालांकि ऐसा नहीं हुआ.

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मौद्रिक नीति समिति monetary policy committee (MPC)ने 2-4 मई के बीच सेंट्रल बोर्ड के साथ बैठक के दौरान यह निर्णय़ किया. रेपो रेट रिजर्व बैंक द्वारा अधिसूचित बैंकों को कम अवधि के लिए दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दर है. रेपो दर में बढ़ोतरी का सीधा मतलब है कि बैंक के लिए कर्ज की लागत बढ़ेगी. इसका बोझ बैंक ग्राहकों को दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर डाल सकते हैं. इसका सीधा प्रभाव आपके घर, वाहन और पर्सनल लोन की ईएमआई बढ़ना तय है.

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ऐसे में कार्मशियल बैंक और एनबीएफसी जल्द ही ब्याज दरों में वृद्धि का ऐलान कर सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे नया कर्ज लोन वालों पर ज्यादा बोझ पड़ेगा. वहीं मौजूदा कर्जदारों, खासकर जिन्होंने फ्लेक्सिबल ब्याज दरों पर कर्ज लिया है, उनकी ईएमआई भी बढ़ जाएगी. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति की पिछली समीक्षा बैठक के दौरान संकेत दिया था कि कम ब्याज दरों का दौर जल्द ही खत्म होने वाला है.

एक्सिस बैंक में एफडी पर भी अब अधिक रिटर्न

एक्सिस बैंक की तरफ से एफडी की दरें हाल ही में बढ़ाई गई हैं। नई दरें 21 मार्च से ही प्रभावी हो चुकी हैं। अब एक्सिस बैंक में 2 करोड़ रुपये से अधिक अस्थिर ब्याज क्या है? की एक साल तक की एफडी पर 4.45 फीसदी ब्याज मिल रहा है। वहीं 2 साल की एफडी पर 4.55 फीसदी ब्याज मिलेगा। अगर आप 3 साल की एफडी कराते हैं तो आपको 4.65 फीसदी ब्याज मिलेगा। इसके अलावा अगर आप 5-10 साल के लिए एफडी कराते हैं तो आपको 4.65 फीसदी का ब्याज अस्थिर ब्याज क्या है? मिलेगा।

भारतीय स्टेट बैंक भी बढ़ा चुका है दरें

अगर थोड़ा पहले तक के आंकड़े देखें तो एसबीआई ने मार्च में ही एफडी की दरें बढ़ा दी हैं। बैंक ने 20-40 फीसदी तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। यह रेट 2 करोड़ रुपये से अधिक की एफडी पर लागू हो रहे हैं। दरें पिछले महीने 10 मार्च से लागू हैं। बैंक की तरफ से 2 करोड़ रुपये से कम की एफडी के लिए एफडी की दरों में 10 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है। 2 साल की एफडी पर अब 5.20 फीसदी ब्याज मिलेगा, वहीं 3-5 साल से कम तक की एफडी पर 5.45 फीसदी ब्याज मिल रहा है। इसके अलावा 5-10 साल की एफडी पर आपको 5.5 फीसदी ब्याज मिलेगा। यह दरें 15 फरवरी से लागू हैं।

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निवेश

अगर आप चाहते हैं कि आपको सालाना 7.अस्थिर ब्याज क्या है? 15 पीसदी की दर से ब्याज मिले, तो आपके लिए निवेश का मौका आ गया है। भारत के अग्रणी वित्तीय संस्थानों में एक पॉवर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 5,000 करोड़ रुपये के कर-योग्य गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (NCD) निर्गम पेश किया है।

आपको कितना मिलेगा ब्याज?

  • तीन वर्ष की अवधि के एनसीडी में 4.65 फीसदी वार्षिक से 4.80 फीसदी वार्षिक तक निर्धारित ब्याज दर की पेशकश है।
  • पांच वर्ष की अवधि के एनसीडी में 5.65 फीसदी वार्षिक से 5.80 फीसदी वार्षिक ब्याज दर की पेशकश की गई है।
  • 10 वर्ष की अवधि के एनसीडी में निर्धारित और अस्थिर ब्याज में निर्धारित न्यूनतम दर या अधिकतम दर के अधीन है। निर्धारित ब्याज दर 6.63 फीसदी वार्षिक से 7.00 फीसदी वार्षिक है।
  • 15 वर्ष की अवधि के एनसीडी में 7.15 फीसदी वार्षिक की अधिकतम ब्याजदर के साथ अनेक निर्धारित ब्याज दरें हैं।
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