क्रिप्टोकरेंसी बाजार

क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है?

क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है?
ग्रीन क्लाइमेट तथा अन्य बॉन्ड तथा तयशुदा आय की परिसंपत्तियां कार्बन-न्यूट्रल की स्पष्ट और प्रत्याशित गारंटी की पेशकश करते हैं। जब तक ये सॉवरिन इश्यूएंस का हिस्सा हैं जब तक कुल उधारी में उनकी हिस्सेदारी को विश्वसनीय मानक के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। यहां दो समस्याएं हैं। पहली यह कि ये सॉवरिन की विशिष्ट शक्ति को कम करके प्रतिमोच्य संसाधन (कर या ऋण) हासिल करती है। यह राज्य के मामलों के संचालन का एक अहम घटक है। कल्पना कीजिए कि युद्ध या महामारी के दौर में कार्बन-न्यूट्रल होने की जरूरत फाइनैंसिंग को प्रभावित करती है। इसके बावजूद कुछ प्रगति की जा सकती है। इंडोनेशियन सुकुक इसका उदाहरण है। दूसरी बात यह कि हरित फाइनैंसिंग हरित खरीद या उपयोगिता की गारंटी नहीं देती जो कम से कम कार्बन-न्यूट्रल होती है। यदि एक ग्रीन बॉन्ड का इस्तेमाल किसी रेलवे परियोजना के वित्त पोषण के लिए किया जाता है लेकिन रेल निर्माण और संचालन में इस्तेमाल होने वाली बिजली और कार्बन खराब ढंग से बनते हैं और रेलवे का इस्तेमाल भी प्राथमिक तौर पर खनन वस्तुओं के उत्पादन के लिए होता है तो क्या उसे कार्बन-न्यूट्रल कहा जा सकता है? मुझे आशंका है कि केंद्रीय बैंक चूंकि आमतौर पर वित्तीय क्षेत्र के प्रोत्साहन को टालने में नाकाम साबित हुए हैं और उनका सामना इस हकीकत से हुआ क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है? है कि किसी तरह की स्वतंत्रता उन्हें अमेरिकी बाजार में नकदी बढ़ाने के प्रभाव या चीन के आसपास के क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के कदमों से सुरक्षित नहीं रख सकती। ऐसे में जलवायु परिवर्तन की समस्या एक ध्यान बंटाने वाली जनसंपर्क की कवायद बनकर रह गई जिसका इस्तेमाल इस हकीकत को छिपाने के लिए किया गया कि वे एक असमान और अनुचित वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के अधीन होकर रह गए हैं।

post banner top

कॉरपोरेट बॉन्ड के प्राइवेट प्लेसमेंट को क्यों पसंद करती हैं कंपनियां, होनी चाहिए जांच: RBI डिप्टी गवर्नर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर (T Rabi क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है? Sankar) ने बुधवार 24 अगस्त को कहा कि इस बात की जांच करने की जरूरत है कि आखिर कंपनियां कॉरपोरेट बॉन्ड (Corporate Bonds) के पब्लिक इश्यू की जगह प्राइवेट प्लेसमेंट को क्यों पसंद करती हैं। बता दें कि बॉन्ड की ओपन मार्केट में बिक्री करने की जगह उसे पहले से चुने निवेशकों और संस्थानों को बेचना, प्राइवेट प्लेसमेंट कहलाता है।

टी रबी शंकर ने बॉम्बे चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में दिए गए एक बयान में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा, "क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है? प्राइवेट प्लेसमेंट को लेकर काफी ज्यादा तरजीह दी जा रही है।" उन्होंने कहा, "शायद इस बात को देखने का समय आ गया है कि आखिर क्यों बॉन्ड जारी करने वाले संस्था पब्लिक इश्यू की प्रक्रिया को अपनाने से परहेज कर रहे हैं।"

एचडीएफसी मसाला बॉन्ड के जरिए जुटाएगा 500 करोड़, जानिए क्या होते हैं मसाला बॉन्ड्स

नई दिल्ली: मार्टगेज लेंडर (संपत्ति के बदले कर्ज देने वाला) एचडीएफसी ने गुरुवार को बताया कि वह विदेशी निवेशकों से रुपया नामित बॉन्ड (रुपी डॉमिनेटेड बॉन्ड) के जरिए 500 करोड़ रुपए जुटाएगा। बॉन्ड्स के बारे में तो आप सभी ने जरूर सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मसाला बॉन्ड्स क्या होते हैं? जागरण डॉट कॉम आज अपनी खबर में मसाला बॉन्ड्स के बारे में ही पूरी जानकारी देने जा रहा है।

क्या होता है बॉन्ड

बॉन्ड एक तरह का सुरक्षित ऋण होता है। जब आप बॉन्ड खरीदते हो, तब दरअसल आप सरकार, नगर महापालिका, कोरपोरेशन और फेडरल एजेंसी जैसी किसी इकाई को जारीकर्ता के तौर पर पैसे दे रहे होते हैं, यानी कि उधार। इसमें जारीकर्ता आपको एक बॉन्ड जारी करता है जिसमें यह वादा करना होता है कि आप इसकी मैच्योरिटी पूरी होने पर ब्याज समेत इसकी फेस वैल्यु का भुगतान भी करेंगे।

आखिर कितना हरित है मेरा केंद्रीय बैंक?

यह दिलचस्प बात है क्योंकि केंद्रीय बैंक अक्सर अपना अधिकांश निवेश पोर्टफोलियो स्वर्ण, राष्ट्रीय और विदेशी नकदी तथा सॉवरिन बॉन्ड के रूप में रखते हैं। ऐसे में कोई व्यक्ति यह आकलन कैसे करेगा कि बॉन्ड और नकद परिसंपत्तियां कार्बन-न्यूट्रल हैं या नहीं? अजीब बात यह भी है कि सोने को कार्बन-न्यूट्रल आकलन से बाहर रखा गया है क्योंकि इसका आकलन करने का कोई तरीका मौजूद नहीं था। मैं यह कल्पना भी नहीं कर सकता कि सोने की खदान में होने वाला काम कार्बन-न्यूट्रल है, लेकिन फिलहाल इसे जाने दें।

इस विषय पर जो भी सामग्री उपलब्ध है वह सरकारी वित्त के बुनियादी सिद्धांत की अनदेखी करती है। सरकार का राजस्व सीधे व्यय से संबद्ध नहीं है। सरकार अपना कर राजस्व बढ़ाने के लिए व्यय नहीं करती। यह बात डेट के जरिये भरपाई किए जाने वाले सरकारी व्यय पर भी लागू होती है। यदि ऐसे डेट फाइनैंसिंग वाले व्यय का इस्तेमाल केवल पूंजीगत व्यय के लिए किया जाए तो भी पूंजीगत व्यय के पोर्टफोलियो का आकलन उसके कार्बन प्रभाव के आधार पर नहीं किया जा सकता है क्योंकि ऐसे निवेश का बड़ा हिस्सा वित्तीय निवेश होता है। ऐसा भी नहीं है कि वे राजस्व केवल इसलिए जुटाते हैं ताकि आम परिवारों की तरह वस्तुएं एवं सेवाएं जुटा सकें। इसके अलावा सरकारी व्यय का बड़ा हिस्सा स्थानांतरण में होता है जो अर्थव्यवस्था में संसाधनों का आवंटन एवं वितरण को प्रभावित करना चाहती है। इनकी भरपाई डेट या करों के माध्यम से होती है लेकिन यहां व्यय का प्रयोग उस संदर्भ में नहीं होता है जिस संदर्भ में कंपनियां और आम परिवार करते हैं।

आखिर कितना हरित है मेरा केंद्रीय बैंक?

यह दिलचस्प बात है क्योंकि केंद्रीय बैंक अक्सर अपना अधिकांश निवेश पोर्टफोलियो स्वर्ण, राष्ट्रीय और विदेशी नकदी तथा सॉवरिन बॉन्ड के रूप में रखते हैं। ऐसे में कोई व्यक्ति यह आकलन कैसे करेगा कि बॉन्ड और नकद परिसंपत्तियां कार्बन-न्यूट्रल हैं या नहीं? अजीब बात यह भी है कि सोने को कार्बन-न्यूट्रल आकलन से बाहर रखा गया है क्योंकि इसका आकलन करने का कोई तरीका मौजूद नहीं था। मैं यह कल्पना भी नहीं कर सकता कि सोने की खदान में होने वाला काम कार्बन-न्यूट्रल है, लेकिन फिलहाल इसे जाने दें।

इस विषय पर जो भी सामग्री उपलब्ध है वह सरकारी वित्त के बुनियादी सिद्धांत की अनदेखी करती है। सरकार का राजस्व सीधे व्यय से संबद्ध नहीं है। सरकार अपना कर राजस्व बढ़ाने के लिए क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है? व्यय नहीं करती। यह बात डेट के जरिये भरपाई किए जाने वाले सरकारी व्यय पर भी लागू होती है। यदि ऐसे डेट फाइनैंसिंग वाले व्यय का इस्तेमाल केवल पूंजीगत व्यय के लिए किया जाए तो भी पूंजीगत व्यय के पोर्टफोलियो का आकलन उसके कार्बन प्रभाव के आधार पर नहीं किया जा सकता है क्योंकि ऐसे निवेश का बड़ा हिस्सा वित्तीय निवेश होता है। ऐसा भी नहीं है कि वे राजस्व केवल इसलिए जुटाते हैं ताकि आम परिवारों की तरह वस्तुएं एवं सेवाएं जुटा सकें। इसके अलावा सरकारी व्यय का बड़ा हिस्सा स्थानांतरण में होता है जो अर्थव्यवस्था में संसाधनों क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है? क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है? का आवंटन एवं वितरण को प्रभावित करना चाहती है। इनकी भरपाई डेट या करों के माध्यम से होती है लेकिन यहां व्यय का प्रयोग उस संदर्भ में नहीं होता है जिस संदर्भ में कंपनियां और आम परिवार करते हैं।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम | Sovereign Gold Bond Scheme in Hindi

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम (Sovereign gold bond scheme in hindi)क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है? योजना भारत में, भारत सरकार के द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से चालू की गई है। इस योजना के माध्यम से सोने में हम सभी निवेश कर सकते हैं। इस योजना के तहत निवेशकों को गोल्ड बॉन्ड प्रदान किया जाता है। इन गोल्ड बॉन्ड को एक निश्चित समय के बाद पैसे में बदला जा सकता है। भारत में सोने के आयात को कम करना इस योजना का मुख्य लक्ष्य है, जिसके कारण भारत में “विदेशी मुद्रा” को कम किया जा सके। इस योजना के निम्नलिखित मुख्य बिंदु हैं

  • इस योजना के तहत सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को रुपयों में भी खरीद सकते हैं।
  • नवंबर 2015 में भारत सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड इश्यू जारी किए थे, यह गोल्ड ब्रांड इश्यू मोनेटाइजेशन स्कीम के उपलक्ष में जारी किए गए थे।
  • गोल्ड ब्रांड, ग्रामों में अंकित होते हैं।
  • इस योजना के तहत हम कम से कम 1 ग्राम गोल्ड ब्रांड में निवेश कर सकते हैं।
  • इस योजना के तहत क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है? अधिक से अधिक हम 4 किलोग्राम तक गोल्ड ब्रांड में निवेश कर सकते हैं।
  • इस योजना के माध्यम से भारत में सोने की खरीदारी को कम करना है, ताकि भारत में सोने की शारीरिक मांग अधिक न हो सके।

सॉवरेन गोल्ड ब्रांड स्कीम में निवेश करने के लाभ | Benefits of investing in Sovereign Gold Bonds Details in Hindi

वर्तमान में निवेश की दृष्टि से यह योजना बहुत अच्छी है एवं बहुत फायदे वाली योजना है। इस योजना के तहत निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं-

  • इस योजना के तहत निवेश करना बहुत ही अच्छा है, क्योंकि इस योजना में कोई भी कर नहीं लगता है।
  • जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सोने के आभूषण बनवाने के समय उनकी बनवाई पर हमारा ही पैसा लगता है। इस बांड के तहत ऐसा किसी भी प्रकार का खर्चा नहीं लगता है।
  • आभूषण बनवाने के समय हमें सोने की शुद्धता पर शंका रहती है, इस ब्रांड में हमें किसी भी प्रकार की चिंता क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है? नहीं रहती है।
  • इस ब्रांड के तहत उधार लेना बहुत ही आसान होता है।
  • सोना चोरी भी हो सकता है, क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है? परंतु इस प्रकार के ब्रांड हमें इस डर से बचाए रखते हैं।
  • इस प्रकार के ब्रांड में निवेश करना आसान है, निवेशक चाहे तो समय से पहले ही बाहर आ सकते हैं।
  • इस प्रकार के ब्रांडों को दूसरे ब्रांडो में बदलना आसान होता है, जिसके कारण निवेश करना भी अच्छा है।
  • इस प्रकार के ब्रांडों के मूल्यों का भुगतान सोने की वर्तमान कीमत के हिसाब से होता है। इस कारण से यह ब्रांड निवेश करने के लिए अच्छे है।
  • यह ब्रांड “रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया” जारी करता है, जिसके कारण निवेशकों को किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं रहता है एवं जितनी भी कंपनियां जारी करती हैं, वह न तो भाग सकती हैं, न दिवालिया घोषित होंगी।
  • इस ब्रांड के तहत सोने की कीमत बढ़ने के अलावा निवेशकों को 2.5% की दर से भी ज्यादा ब्याज मिल जाता है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने वाले | Investors in Sovereign Gold Bonds Details in Hindi

इस योजना के तहत निम्नलिखित निवेश कर सकते हैं-

  • निवेश करने वाला भारत का वासी हो।
  • भारत में रहने वाले व्यक्ति की परिभाषा विदेशी मुद्रा प्रबंधन के अधिनियम की धारा 2(U) की धारा 2(बी) के तहत दी गई है।
  • निवेश करने वाला व्यक्ति अकेला भी हो सकता है अथवा वह किसी व्यक्ति के साथ में भी निवेश कर सकता है अर्थात दो या दो से अधिक व्यक्ति भी साथ में निवेश कर सकते हैं।
  • निवेश करने वाला व्यक्ति 18 वर्ष से कम का भी हो सकता है।
  • इस ब्रांड में निवेशक करने वाली किसी भी प्रकार की संस्था हो सकती है, जैसे- धार्मिक संस्थान, विश्वविद्यालय आदि।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की पांचवी सीरीज | 5th Series of Sovereign Gold Bonds Details in Hindi

इस स्कीम की 4 सीरीज पहले आ चुकी है, वर्तमान में पांचवी सीरीज चल रही है

  • वर्तमान में यह सावरेन गोल्ड बॉन्ड की पांचवी सीरीज है, यह सीरीज 2020-21 वित्त वर्ष के लिए होगी।
  • यह निवेशकों के लिए “3 से 7 अगस्त” के बीच में खोली जाएगी।
  • इस सीरीज के तहत सावरेन गोल्ड ब्रांड के लिए “क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है? क्यों सरकार विदेशी बॉन्ड जारी करती है? आधार मूल्य 5334 रुपए प्रति ग्राम” रखा गया है। अर्थात प्रति 10 ग्राम की कीमत 53340 रखी गई है।
  • ऑनलाइन ब्रांड खरीदने वालों के लिए “आधारमूल्य प्रति 10 ग्राम 52840 रुपए” होगा एवं हर ग्राम पर ₹50 कम लिया जाएगा।

उम्मीद है कि आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम (Sovereign gold bond scheme in Hindi) के बारे में सभी आवश्यक विवरण जान चुके होंगे। यदि आपको सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम (Sovereign gold bond scheme in Hindi) से संबंधित कोई प्रश्न है, तो आप नीचे कमेंट सेक्शन में इसका उल्लेख कर सकते हैं। साथ ही आप हमारा टेस्टबुक ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं। यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो यह ऐप आपके लिए काफी लाभदायक रहेगा। इस ऐप में आपको प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए टेस्ट सीरीज, मॉक टेस्ट, पीडीएफ पिछले साल के प्रश्न पत्र सभी कुछ प्रदान किया जाएगा। टेस्टबुक ऐप डाउनलोड करके विभिन्न सरकारी नौकरी परीक्षाओं जैसे बैंकिंग, एसएससी, रेलवे आदि की तैयारी करें!

रेटिंग: 4.49
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 532
उत्तर छोड़ दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| अपेक्षित स्थानों को रेखांकित कर दिया गया है *