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विदेशी मुद्रा खरीदने का सबसे सस्ता तरीका क्या है?

विदेशी मुद्रा खरीदने का सबसे सस्ता तरीका क्या है?

भारत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसे ट्रांसफर करने के सर्वोत्तम तरीके

नवागंतुकों और विदेशी मूल निवासियों के लिए उपलब्ध अवसरों की संख्या में वृद्धि के साथ, हम जिस दुनिया में रहते हैं वह बहुत छोटी जगह बन गई है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि भारत से जावक प्रेषण या धन भेजना एक आम बात है जो हाल के वर्षों में बढ़ी है। शिक्षा और काम के अवसरों की खोज से लेकर यात्रा या किसी अन्य कारण से जो आपको विदेश ले जा सकता है, आपको नए स्थान के अनुकूल होने और अपने प्रवास को आरामदायक बनाने के लिए समय और धन दोनों की आवश्यकता होती है।

लोग कई कारणों से भारत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसा ट्रांसफर करते हैं, चाहे वह संपत्ति खरीदना हो या किराए पर लेना हो, ट्यूशन और स्कूल की फीस चुकानी हो, विदेश में छुट्टियाँ मनानी हो, दोस्तों और रिश्तेदारों को गिफ्ट भेजना हो, किसी विदेशी विक्रेता से कुछ खरीदना हो या कुछ और। यात्रा और शिक्षा भारत से बाहरी प्रेषण के कारणों पर हावी है, इसके बाद करीबी रिश्तेदारों और उपहारों का रखरखाव किया जाता है।

अगर आप भी सोच रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसा कैसे ट्रांसफर किया जाए और प्रक्रिया के बारे में पता नहीं है, तो यह समझने के लिए पढ़ें कि अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर को आसानी से कैसे किया जाए।

इंटरनेशनल मनी ट्रांसफर क्या है और दूसरे देश में पैसे कैसे ट्रांसफर करें?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) भारतीय नागरिकों को बाहरी प्रेषण नामक प्रक्रिया के माध्यम से भारत से धन भेजने की अनुमति देता है जो विभिन्न विदेशी नियमों द्वारा निर्देशित होता है।

यह जावक प्रेषण बैंकों, डाकघरों और डिजिटल भुगतान प्लेटफार्मों के माध्यम से किया जा सकता है।

आरबीआई प्रति वित्तीय वर्ष में एक व्यक्ति या संस्था द्वारा व्यावसायिक यात्राओं, अवकाश यात्राओं, उपहार या दान, विदेशी शिक्षा और रोजगार, चिकित्सा और विदेशों में रिश्तेदारों के अन्य आवश्यक खर्चों जैसे उद्देश्यों के लिए भारत से $ 250, 000 तक की अनुमति देता है।

जावक प्रेषण करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों में स्थायी खाता संख्या (पैन) कार्ड की प्रति, मूल शुल्क पर्ची / रसीद / बिल जहाँ आवश्यक हो, पर्याप्त धन का प्रमाण, फॉर्म A2 आदि शामिल हैं जो आपके द्वारा चुने गए बैंक और प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं।

भारत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसा ट्रांसफर करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

जब आप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसा भेजते हैं, तो आपको अपने पैसों का मूल्य पाने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए।

स्थानांतरण गति: आपको उचित ऑनलाइन चैनलों के माध्यम से भारत से भेजे गए धन के लिए लगभग 48-72 घंटे की आदर्श समय सीमा और चेक और डिमांड ड्राफ्ट के लिए कुछ दिनों की अपेक्षा करनी चाहिए।

विनिमय दरें: विदेशी विनिमय दर किसी अन्य विदेशी मुद्रा की तुलना में मुद्रा का मूल्य है। विनिमय दर में एक छोटा-सा अंतर बड़ी राशि भेजने में महत्त्वपूर्ण अंतर ला सकता है।

ओवरहेड शुल्क: धन हस्तांतरित करते समय, बहुत बार आपसे एक हस्तांतरण शुल्क लिया जाएगा जिसे तय किया जा सकता है या आपके द्वारा स्थानांतरित की जा रही राशि का प्रतिशत, साथ ही कुछ मामलों में विदेशी रूपांतरण कर और सेवा कर, शामिल प्रत्येक संस्था के लिए लिया जाएगा। स्थानांतरण प्रक्रिया में।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसे ट्रांसफर करने के सर्वोत्तम तरीके

ऐसी कई विधियाँ उपलब्ध हैं जिन्हें आप भारत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन हस्तांतरित करने के लिए चुन सकते हैं। पसंदीदा तरीका उस उद्देश्य पर अत्यधिक निर्भर करेगा जिसके लिए आप पैसे भेज रहे हैं, या पूर्वापेक्षाएँ, जैसे कि क्या आपको किसी आपात स्थिति में जल्दी पहुँचने के लिए धन की आवश्यकता है, एक बजट विकल्प की तलाश कर रहे हैं या केवल एक विशिष्ट संस्थान के साथ जाना चाहते हैं जैसे आपका बैंक या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म।

1. बैंक ड्राफ्ट और कैशियर चेक

बैंक ड्राफ्ट और कैशियर चेक देश भर के विभिन्न बैंक आउटलेट्स पर उपलब्ध हैं। आप जिस स्थान पर पैसे भेज रहे हैं, उस मुद्रा में आप बैंक ड्राफ्ट और कैशियर चेक भौतिक रूप से खरीद सकते हैं। वे विदेशों में पैसा भेजने का एक आदर्श तरीका हैं क्योंकि वे तुलनात्मक रूप से सस्ते हैं, हालांकि प्राप्तकर्ता तक पहुँचने में अधिक समय लगता है। ड्राफ्ट और चेक का पता लगाया जा सकता है यदि चेक या ड्राफ्ट गंतव्य तक नहीं पहुँचते हैं और भारत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन हस्तांतरण करते समय मन की पूरी शांति प्रदान करते हैं।

2. अंतर्राष्ट्रीय मनी ऑर्डर / ऑफलाइन मनी ट्रांसफर

ऑनलाइन वायर ट्रांसफर के अस्तित्व में आने से पहले, मनी ऑर्डर विदेश में पैसा भेजने का पसंदीदा तरीका था, यहाँ तक कि उन लोगों के लिए भी जो दूसरे देश में पैसा भेजना नहीं जानते थे। मनीआर्डर को आपके बैंक खाते में जमा किया जा सकता है या किसी भी चेक कैशिंग स्थान पर भुनाया जा सकता है। यह अभी भी भारत से पैसे भेजने का एक सुरक्षित और सस्ता तरीका है।

3. ऑनलाइन मनी ट्रांसफर

ऑनलाइन मनी ट्रांसफर विदेश में पैसा भेजने के सबसे आसान तरीकों में से एक है। भारत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन हस्तांतरण करने के लिए अधिकांश भारतीय इस पद्धति का उपयोग करते हैं। इस प्रक्रिया में केवल गंतव्य खाता विवरण, प्राप्तकर्ता बैंक का IBAN या SWIFT कोड, खाता धारक की जानकारी आदि की आवश्यकता होती है। हालाँकि, ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में मध्यस्थ बैंकों को शामिल नहीं किया गया है, इसलिए आपसे भारी कर और उच्च विनिमय दरें लगाई जा सकती हैं।

4. ऑनलाइन वायर ट्रांसफर

यह मनी ट्रांसफर व्यवसाय में उभरने का नवीनतम तरीका है और भारत से अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर करने के लिए कम विदेशी मुद्रा खरीदने का सबसे सस्ता तरीका क्या है? शुल्क के साथ-साथ लगाए गए शुल्क भी प्रदान करता है। विभिन्न वित्तीय संस्थान उपलब्ध हैं जिनका उपयोग आप बैंक, या अधिकृत धन जैसे वायर ट्रांसफर करने के लिए कर सकते हैं

आज, आप भारत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनी ट्रांसफर करने के लिए उपलब्ध विकल्पों की संख्या तक सीमित नहीं हैं और चुनने के लिए कंपनियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की अधिकता तक पहुँच है। आप जो भी चुनते हैं, प्राप्तकर्ता खाता संख्या और अन्य विवरण जैसे विवरणों को सत्यापित करना सुनिश्चित करें। कीमतों और विनिमय दरों की तुलना करना न भूलें और इस बात पर ध्यान दें कि हस्तांतरण में कितना समय लगेगा, खासकर अगर प्राप्तकर्ता एक तंग समय सीमा पर है। यदि आपको भविष्य में इसे ट्रैक करने की आवश्यकता है और धोखाधड़ी और घोटालों से सावधान रहें, तो हमेशा अपने लेन-देन का रिकॉर्ड रखें। जब आपके पैसे से निपटने की बात आती है तो केवल आजमाए हुए और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म चुनें।

RBI के कदमों से विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट की रफ्तार कम हुई- रिपोर्ट

देश का विदेशी मुद्रा भंडार पांच अगस्त को समाप्त सप्ताह में 89.7 करोड़ डॉलर घटकर 572.978 अरब डॉलर रह गया है. वहीं 29 जुलाई के हफ्ते में इसमें 2.3 अरब डॉलर की बढ़त रही है.

RBI के कदमों से विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट की रफ्तार कम हुई- रिपोर्ट

TV9 Bharatvarsh | Edited By: सौरभ शर्मा

Updated on: Aug 19, 2022 | 9:31 AM

भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार घटने की दर में कमी आई है. आरबीआई अधिकारियों के अध्ययन में यह कहा गया है. अध्ययन में 2007 से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण मौजूदा समय में उत्पन्न उतार-चढ़ाव को शामिल किया गया है. केंद्रीय बैंक की विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की एक घोषित नीति है. केंद्रीय बैंक यदि बाजार में अस्थिरता देखता है, तो हस्तक्षेप करता है. हालांकि, रिजर्व बैंक ने अभी तक रुपये के किसी स्तर को लेकर अपना कोई लक्ष्य नहीं दिया है.

क्या है रिपोर्ट में खास

आरबीआई के वित्तीय बाजार संचालन विभाग के सौरभ नाथ, विक्रम राजपूत और गोपालकृष्णन एस के अध्ययन में कहा गया है कि 2008-09 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान भंडार 22 प्रतिशत कम हुआ था. यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद उत्पन्न उतार-चढ़ाव के दौरान इसमें केवल छह प्रतिशत की कमी आई है. अध्ययन में कहा गया है कि इसमें व्यक्त विचार लेखकों के हैं और यह कोई जरूरी नहीं है कि यह केंद्रीय बैंक की सोच से मेल खाए. रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर अपने हस्तक्षेप उद्देश्य को प्राप्त करने में सफल रहा है. यह विदेशी मुद्रा भंडार में घटने की कम दर से पता चलता है. अध्ययन के अनुसार, निरपेक्ष रूप से 2008-09 के वैश्विक वित्तीय संकट के कारण मुद्रा भंडार में 70 अरब अमेरिकी डॉलर की गिरावट आई. जबकि कोविड-19 अवधि के दौरान इसमें 17 अरब डॉलर की ही कमी हुई. वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इस वर्ष 29 जुलाई तक 56 अरब डॉलर की कमी आई है. अध्ययन में कहा गया है कि उतार-चढ़ाव को प्रभावित करने वाले प्रमुख तत्वों में ब्याज दर, मुद्रास्फीति, सरकारी कर्ज, चालू खाते का घाटा, जिंसों पर निर्भरता राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर घटनाक्रम शामिल हैं.

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आज आएंगे विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े

आज रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े जारी करेगा. फिलहाल इसमें स्थिरता से बढ़त तक का अनुमान है क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपया 80 के स्तर से नीचे ही बना हुआ है, वहीं हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारो में जमकर खरीद की है. देश का विदेशी मुद्रा भंडार पांच अगस्त को समाप्त सप्ताह में 89.7 करोड़ डॉलर घटकर 572.978 अरब डॉलर रह गया है. 29 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान, विदेशी मुद्रा भंडार में 2.315 अरब डॉलर की बढ़त देखने को मिली थी.

विदेशी मुद्रा भंडार में इस हफ्ते भी आई गिरावट, गोल्ड रिजर्व में रही तेजी, चेक करें आंकड़े

Foreign Exchange Reserves: विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट देखने को मिली है. देश का विदेशी मुद्रा भंडार 25 मार्च को समाप्त सप्ताह में 2.03 अरब डॉलर घटकर 617.648 अरब डॉलर रह गया है.

By: पीटीआई, एजेंसी | Updated at : 02 Apr 2022 03:01 PM (IST)

विदेशी मुद्रा भंडार (फाइल फोटो)

Foreign Exchange Reserves: विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट देखने को मिली है. देश का विदेशी मुद्रा भंडार 25 मार्च को समाप्त सप्ताह में 2.03 अरब डॉलर घटकर 617.648 अरब डॉलर रह गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of Indai) ने इस बारे में जानकारी दी है.

लगातार आ रही है गिरावट
इससे पहले 18 मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 2.597 विदेशी मुद्रा खरीदने का सबसे सस्ता तरीका क्या है? अरब डॉलर घटकर 619.678 अरब डॉलर रह गया था. इससे पहले यानी 11 मार्च, 2021 को समाप्त सप्ताह में विदेशीमुद्रा भंडार 9.646 अरब डॉलर घटकर 622.275 अरब डॉलर रह गया था.

RBI ने जारी किए आंकड़े
आरबीआई की ओर से जारी साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) के घटने की वजह से आई जो कुल मुद्राभंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है.

FCA में आई गिरावट
आंकड़ों के मुताबिक, 25 मार्च को समाप्त सप्ताह में FCA 3.202 अरब डॉलर घटकर 550.454 अरब डॉलर रह गया. डॉलर में अभिव्यक्त विदेशी मुद्रा भंडार में रखे जाने वाले विदेशी मुद्रा आस्तियों में यूरो, पौंड और येन जैसे गैर अमेरिकी मुद्रा में मूल्यवृद्धि अथवा मूल्यह्रास के प्रभावों को शामिल किया जाता है.

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कितना रहा गोल्ड रिजर्व?
आलोच्य सप्ताह में स्वर्ण भंडार (Gold Reserve) 1.23 अरब डॉलर बढ़कर 43.241 अरब डॉलर हो गया. समीक्षाधीन सप्ताह में, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास जमा विशेष आहरण अधिकार (SDR) 4.4 करोड़ डॉलर घटकर 18.821 अरब डॉलर रह गया. IMF में रखे देश का मुद्रा भंडार 1.4 करोड़ डॉलर घटकर 5.132 अरब डॉलर रह गया.

Published at : 02 Apr 2022 03:00 PM (IST) Tags: foreign currency gold reserve foreign exchange reserves Gold forex हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Business News विदेशी मुद्रा खरीदने का सबसे सस्ता तरीका क्या है? in Hindi

Foreign Exchange Reserves: लगातार विदेशी मुद्रा भंडार में आ रही गिरावट, गोल्ड रिजर्व भी फिसला, RBI ने जारी किया आंकड़ा

Foreign Exchange Reserves: देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. 22 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में मुद्रा भंडार 3.271 अरब डॉलर घटकर 600.423 अरब डॉलर रह गया है.

By: ABP Live | Updated at : 30 Apr 2022 07:46 AM (IST)

विदेशी मुद्रा भंडार (फाइल फोटो)

Foreign Exchange Reserves: देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. 22 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में मुद्रा भंडार (Forex Reserve) 3.271 अरब डॉलर घटकर 600.423 अरब डॉलर रह गया है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) ने आंकड़े जारी कर इस बारे में बताया है.

लगातार विदेशी मुद्रा भंडार में आ रही गिरावट
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इससे पहले 15 अप्रैल को समाप्त सप्ताह के दौरान भी इसमें 31.1 करोड़ डॉलर की कमी आई थी और यह घटकर 603.694 अरब डॉलर रह गया था.

FCA में भी आई गिरावट
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) घटने की वजह से हुई जो कुल मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. आंकड़ों के मुताबिक, 22 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में एफसीए 2.835 अरब डॉलर घटकर 533.933 अरब डॉलर रह गया.

गोल्ड रिजर्व में भी आई गिरावट
आपको बता दें डॉलर में अभिव्यक्त किए जाने वाले विदेशी मुद्रा अस्तियों में विदेशी मुद्रा संपत्तियों में यूरो, पौंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्रा के घट-बढ़ को भी शामिल किया जाता है. आंकड़ों के मुताबिक, आलोच्य सप्ताह के दौरान देश का गोल्ड रिजर्व 3.77 करोड़ डॉलर घटकर 42.768 अरब डॉलर पर पहुंच गया.

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SDR भी फिसला
आरबीआई ने कहा कि इस सप्ताह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास जमा विशेष आहरण अधिकार (SDR) 3.3 करोड़ डॉलर घटकर 18.662 अरब डॉलर रह गया. आंकड़ों के अनुसार, आईएमएफ (IMF) में रखे गए देश का मुद्रा भंडार 2.6 करोड़ डॉलर घटकर 5.060 अरब डॉलर पर आ गया है.

मार्च से अबतक 14.272 अरब डॉलर फिसला
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक लेख में यह कहा गया है. आरबीआई 2019 से विदेशी मुद्रा भंडार पर जोर दे रहा है और यह तीन सितंबर, 2021 को रिकॉर्ड 642.453 अरब डॉलर पर पहुंच गया. यह दिसंबर, 2018 के मुकाबले दोगुना से अधिक है. हालांकि, मार्च 2022 में विदेशी मुद्रा भंडार 14.272 अरब डॉलर घट गया. इसका कारण विकसित देशों में ब्याज दर बढ़ने और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण घरेलू बाजार से पूंजी निकासी है.

Published at : 30 Apr 2022 07:46 AM (IST) Tags: Reserve Bank of India RBI foreign currency gold reserve foreign exchange reserves Gold forex हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Business News in Hindi

डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत कैसे तय होती है, रुपया कमजोर, डॉलर मजबूत क्यों हुआ?

भारतीय रुपया इस साल डॉलर के मुकाबले करीब 7 फीसदी कमजोर हुआ है. न केवल रुपया बल्कि दुनियाभर की करेंसी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं. यूरो, डॉलर के मुकाबले 20 साल के न्यूनतम स्तर पर है. आखिर क्या वजह है कि दुनियाभर की करेंसी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रही हैं और डॉलर लगातार मजबूत होता जा रहा है?

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पंकज कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 19 जुलाई 2022,
  • (अपडेटेड 19 जुलाई 2022, 1:46 PM IST)
  • एक डॉलर की कीमत 80 रुपये हुई
  • डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ

मेरी पीढ़ी ने जबसे होश संभाला है तब से अख़बारों और टीवी पर यही हेडलाइन पढ़ी कि डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकॉर्ड गिरावट. आज फिर हेडलाइन है रुपये में रिकॉर्ड गिरावट, एक डॉलर की कीमत 80 रुपये के पार हुई. अक्सर डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत को देश की प्रतिष्ठा के साथ जोड़ा जाता है. लेकिन क्या यह सही है? आजादी के बाद भारत सरकार ने लंबे समय तक कोशिश की कि रुपये की कीमत को मजबूत रखा जा सके. लेकिन उन देशों का क्या जिन्होंने खुद अपनी करेंसी की कीमत घटाई? करेंसी की कीमत घटाने की वजह से उन देशों की आर्थिक हालत न केवल बेहतर हुई बल्कि दुनिया की चुनिंदा बेहतर अर्थव्यवस्थाओं में वो देश शामिल भी हुए.

डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत कैसे तय होती है?

किसी भी देश की करेंसी की कीमत अर्थव्यवस्था के बेसिक सिद्धांत, डिमांड और सप्लाई पर आधारित होती है. फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में जिस करेंसी की डिमांड ज्यादा होगी उसकी कीमत भी ज्यादा होगी, जिस करेंसी की डिमांड कम होगी उसकी कीमत भी कम होगी. यह पूरी तरह से ऑटोमेटेड है. सरकारें करेंसी के रेट को सीधे प्रभावित नहीं कर सकती हैं.

करेंसी की कीमत को तय करने का दूसरा एक तरीका भी है. जिसे Pegged Exchange Rate कहते हैं यानी फिक्स्ड एक्सचेंज रेट. जिसमें एक देश की सरकार किसी दूसरे देश के मुकाबले अपने देश की करेंसी की कीमत को फिक्स कर देती है. यह आम तौर पर व्यापार बढ़ाने औैर महंगाई को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.

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उदाहरण के तौर पर नेपाल ने भारत के साथ फिक्सड पेग एक्सचेंज रेट अपनाया है. इसलिए एक भारतीय रुपये की कीमत नेपाल में 1.6 नेपाली रुपये होती है. नेपाल के अलावा मिडिल ईस्ट के कई देशों ने भी फिक्स्ड एक्सचेंज रेट अपनाया है.

किसी करेंसी की डिमांड कम और ज्यादा कैसे होती है?

डॉलर दुनिया की विदेशी मुद्रा खरीदने का सबसे सस्ता तरीका क्या है? सबसे बड़ी करेंसी है. दुनियाभर में सबसे ज्यादा कारोबार डॉलर में ही होता है. हम जो सामान विदेश से मंगवाते हैं उसके बदले हमें डॉलर देना पड़ता है और जब हम बेचते हैं तो हमें डॉलर मिलता है. अभी जो हालात हैं उसमें हम इम्पोर्ट ज्यादा कर रहे हैं और एक्सपोर्ट कम कर रहे हैं. जिसकी वजह से हम ज्यादा डॉलर दूसरे देशों को दे रहे हैं और हमें कम डॉलर मिल रहा है. आसान भाषा में कहें तो दुनिया को हम सामान कम बेच रहे हैं और खरीद ज्यादा रहे हैं.

फॉरेन एक्सचेंज मार्केट क्या होता है?

आसान भाषा में कहें तो फॉरेन एक्सचेंज एक अंतरराष्ट्रीय बाजार है जहां दुनियाभर की मुद्राएं खरीदी और बेची जाती हैं. यह बाजार डिसेंट्रलाइज्ड होता है. यहां एक निश्चित रेट पर एक करेंसी के बदले दूसरी करेंसी खरीदी या बेची जाती है. दोनों करेंसी जिस भाव पर खरीदी-बेची जाती है उसे ही एक्सचेंज रेट कहते हैं. यह एक्सचेंज रेट मांग और आपूर्ति के सिंद्धांत के हिसाब से घटता-बढ़ता रहा है.

करेंसी का डिवैल्यूऐशन और डिप्रीशीएशन क्या है?

करेंसी का डिप्रीशीएशन तब होता है जब फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट पर करेंसी की कीमत घटती है. करेंसी का डिवैल्यूऐशन तब होता है जब कोई देश जान बूझकर अपने देश की करेंसी की कीमत को घटाता है. जिसे मुद्रा का अवमूल्यन भी कहा जाता है. उदाहरण के तौर पर चीन ने अपनी मुद्रा का अवमूल्यन किया. साल 2015 में People’s Bank of China (PBOC) ने अपनी मुद्रा चीनी युआन रेनमिंबी (CNY) की कीमत घटाई.

मुद्रा का अवमूल्यन क्यों किया जाता है?

करेंसी की कीमत घटाने से आप विदेश में ज्यादा सामान बेच पाते हैं. यानी आपका एक्सपोर्ट बढ़ता है. जब एक्सपोर्ट बढ़ेगा तो विदेशी मुद्रा ज्यादा आएगी. आसान भाषा में समझ सकते हैं कि एक किलो चीनी का दाम अगर 40 रुपये हैं तो पहले एक डॉलर में 75 रुपये थे तो अब 80 रुपये हैं. यानी अब आप एक डॉलर में पूरे दो किलो चीनी खरीद सकते हैं. यानी रुपये की कीमत गिरने से विदेशियों को भारत में बना सामान सस्ता पड़ेगा जिससे एक्सपोर्ट बढ़ेगा और देश में विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़ेगा.

डॉलर की कीमत रुपये के मुकाबले क्यों बढ़ रही है?

डॉलर की कीमत सिर्फ रुपये के मुकाबले ही नहीं बढ़ रही है. डॉलर की कीमत दुनियाभर की सभी करेंसी के मुकाबले बढ़ी है. अगर आप दुनिया के टॉप अर्थव्यवस्था वाले देशों से तुलना करेंगे तो देखेंगे कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत उतनी नहीं गिरी है जितनी बाकी देशों की गिरी है.

यूरो डॉलर के मुकाबले पिछले 20 साल के न्यूनतम स्तर पर है. कुछ दिनों पहले एक यूरो की कीमत लगभग एक डॉलर हो गई थी. जो कि 2009 के आसपास 1.5 डॉलर थी. साल 2022 के पहले 6 महीने में ही यूरो की कीमत डॉलर के मुकाबले 11 फीसदी, येन की कीमत 19 फीसदी और पाउंड की कीमत 13 फीसदी गिरी है. इसी समय के भारतीय रुपये में करीब 6 फीसदी की गिरावट आई है. यानी भारतीय रुपया यूरो, पाउंड और येन के मुकाबले कम गिरा है.

डॉलर क्यों मजबूत हो रहा है?

रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से दुनिया में अस्थिरता आई. डिमांड-सप्लाई की चेन बिगड़ी. निवेशकों ने डर की वजह से दुनियाभर के बाज़ारों से पैसा निकाला और सुरक्षित जगहों पर निवेश किया. अमेरिकी निवेशकों ने भी भारत, यूरोप और दुनिया के बाकी हिस्सों से पैसा निकाला.

अमेरिका महंगाई नियंत्रित करने के लिए ऐतिहासिक रूप से ब्याज दरें बढ़ा रहा है. फेडरल रिजर्व ने कहा था कि वो तीन तीमाही में ब्याज दरें 1.5 फीसदी से 1.75 फीसदी तक बढ़ाएगा. ब्याज़ दर बढ़ने की वजह से भी निवेशक पैसा वापस अमेरिका में निवेश कर रहे हैं.

2020 के आर्थिक मंदी के समय अमेरिका ने लोगों के खाते में सीधे कैश ट्रांसफर किया था, ये पैसा अमेरिकी लोगों ने दुनिया के बाकी देशों में निवेश भी किया था, अब ये पैसा भी वापस अमेरिका लौट रहा है.

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