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क्या है ट्रेंड ट्रेडिंग

क्या है ट्रेंड ट्रेडिंग
डाउन ट्रेंड की संरचना (Structure of an Downtrend)

Trading और Investment क्या हैं, दोनों में क्या अंतर है

जब भी नए लोग शेयर मार्केट में आते है। उसके मन में ये सवाल जरूर आता ही हैं। Trading और Investing क्या है इन दोनों में क्या अंतर होते हैं। ये सवाल मन में आना जायज भी हैं। जब तब नए लोगो को ये समझ नहीं आते उसे कैसे पता लगेगा उसका जोखिम क्षमता और लक्ष्य के हिसाब से, Trading और Investing में उसके लिए किया बेहतर होगा। आज हम जानेंगे Trading और Investing होता क्या है, दोनों में क्या अंतर हैं, Trading कितने तरह की होते हैं। साथ ही साथ जानेंगे कि ट्रेडिंग से हर रोज कमाई कर सकते है या नहीं।

Table of Contents

Trading क्या होता है:-

जब भी आप शेयर को खरीदते हो और उस दिन ही बेच देते हो। तब इसे Trading कहते हैं। मतलब आप Stock Trading में ज्यादा समय तक शेयर को अपने पास नहीं रख सकते हो। मान लीजिए आप एक शेयर खरीदा 200 रुपये में प्रॉफिट होने पर आपने उस दिन ही 220 रुपये में बेच दिया। इसी प्रोसेस को कहते है ट्रेडिंग। Trading करते वक्त Trader हमेशा Technical Analysis के साथ चलते हैं। जिससे उस कंपनी के शेयर प्राइस को कुछ समय आगे का शेयर प्राइस अंदाजा हो जाता हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कंपनी क्या काम करती है, भविष्य की योजना क्या हैं। सिर्फ ये देखा जाएगा शेयर प्राइस किस तरफ जा रही है। Trading करते समय न्यूज़ पर ध्यान देना बहुत जरुरी होता हैं. क्युकी कोई अच्छी खबर किसी भी शेयर को ऊपर ले जा सकती हैं। और बुरी खबर एकदम से नीचे भी ला सकती हैं।

Trading के प्रकार (Types of Trading):-

बहुत सारे Types of Trading होते है मुख्य रूप से 5 तरह का होता है। जिससे ट्रेडर ट्रेडिंग करके पैसा कमाई कर सके।

  1. Day Trading:- इसमें ट्रेडर को जिस दिन खरीदा उस दिन ही शेयर को बेचना पड़ता हैं। उस स्टॉक को कुछ समय के लिए होल्ड कर सकता है। मार्केट बंद होने से पहले ही ट्रेडर को शेयर बेचना ही पड़ता हैं। इसमें छोटे छोटे पल स्टॉक में होने वाले ऊपर नीचे से Traders अपना प्रॉफिट कर सकते हैं।
  2. Scalping Trading:- Day Trading और Scalping दोनों एक ही तरह का होता हैं। इस ट्रेडिंग में खरीद बेच होते है लेकिन दिन में कही बार ये ट्रेंड किया जा सकता हैं। आपको प्रॉफिट भी हो सकता है और नुकसान भी, इस पर निर्भर करता है कि आपने किस प्रकार क्या है ट्रेंड ट्रेडिंग का ट्रेंड किया हैं।
  3. Swing Trading:- इस ट्रेडिंग में आप खरीद और बेच तो सकते हो। अगर आपको खरीदा हुआ दिन नुकसान हो रहा है तो आप उस दिन शेयर को ना बेचकर कुछ दिनों तक होल्ड भी कर सकते हो। फिर जब प्रॉफिट आ जाता है तब बेचकर मुनाफा कमाई कर सकते हैं।
  4. Momentum Trading:- इस Trading को ट्रेंडर तब प्रयोग करता है जब कोई शेयर ऊपर जाता दिखता हैं। तब खरीदारी कर लेता है जैसे ही कोई उस शेयर का खराब न्यूज़ आता है तब तुरंत बेच देते हैं। जिससे Trader कुछ समय में ही अच्छी मुनाफा कमाई कर लेते हैं। लेकिन इसके लिए न्यूज़ के साथ अपडेट रहना बहुत जरुरी हैं। अगर सही समय पर शेयर को नहीं बेचा क्या है ट्रेंड ट्रेडिंग तो बहुत ज्यादा नुकसान भी हो सकता हैं।
  5. Position Trading:- इस तरह का ट्रेडिंग में आप कुछ दिनों के लिए ट्रेडिंग कर सकते हैं। ये Trading उन लोगों के लिए है जो लोग नियमित रूप से मार्केट में नहीं आते। खरीद कर कुछ दिनों के बाद मुनाफा आते ही बेच कर निकल जाते। इसी तरह का ट्रेडर को कहते हैं Position Trading।

Investing क्या होता है:-

जब कोई शेयर आज खरीद के बहुत साल बाद बेच देते है तब इसे Investing कहते हैं। इन्वेस्टिंग में आप बहुत लंबे समय के शेयर को अपने Demat Account में रखते हो। कंपनी के वित्तीय विवरण, पिछले प्रदर्शन, भविष्य में होने वाले ग्रोथ को देखते हुए ही किसी भी शेयर में इन्वेस्ट करता हैं। Investing में Fundamental Analysis करना बहुत जरुरी हैं। जिससे आपको कंपनी के बारे अच्छी नॉलेज होगा और भविष्य में अच्छा रितर्न कमाके देगा।

Trading और Investment क्या हैं, दोनों में क्या अंतर है

Investing के प्रकार (Types of Investing):-

मुख्य रूप से इन्वेस्टिंग दो तरह का होता हैं। जिससे आपको लंबे समय में जबरदस्त मुनाफा कमाई करके देगा।

  1. Value Investing:- इस तरह का इन्वेस्टिंग में आप अच्छी कंपनी का शेयर प्राइस जब नीचे आता है। तब आपको उसमे इन्वेस्ट करना चाहिए। Value Investing में इन्वेस्टर शेयर का विश्लेषण करके देखता है कि कौन सा शेयर कम दाम में मिल रहा हैं। फिर उसमे लंबे समय तक निवेश करता हैं।
  2. Growth Investment:- जो कंपनी भविष्य में ग्रोथ की संभावना देखता है उसी शेयर में इन्वेस्टर लंबे समय के लिए निवेश करता है। इसी को Growth Investment कहते हैं। इससे Investor उस कंपनी में ज्यादा इन्वेस्ट करता है जो कंपनी Fundamentally बहुत मजबूत हैं।

Trading और Investing में अंतर क्या है (Difference between Trading and Investing):-

  • Trading कम समय के लिए होता हैं।
  • Investing लंबे समय के लिए होता हैं।
  • इसमें Technical Analysis का इस्तेमाल करते हैं।
  • Investing में Fundamental Analysis का इस्तेमाल करते हैं।
  • Trading में कम समय में बहुत ज्यादा पैसा कमाई कर सकते हैं।
  • इसमें आपका कमाई करने के लिए बहुत ज्यादा समय लगता हैं।
  • ट्रेडिंग करने से ब्रोकर का शुल्क बहुत ज्यादा होता हैं।
  • इन्वेस्टिंग में ब्रोकर का शुल्क ना के बराबर होता हैं।
  • Trading जुआ की तरह होता हैं सोचने समझने के लिए समय नहीं मिलता।
  • Investing में आप सोच समझकर निवेश कर सकते हैं

क्या Trading से रोज पैसा कमाई कर सकते है:-

जी बिल्कुल आप ट्रेडिंग से हर रोज पैसा कमाई कर सकते हो। लेकिन जैसा कि हम जानते है Share Market रिस्क भी होता हैं। जिस तरह आप रेगुलर कमाई कर सकते है ठीक उसी तरह नुकसान भी हो सकता हैं। लाभ और नुकसान निर्भर करता है आपके ट्रेडिंग रणनीति के ऊपर। कब आप कौन सा ट्रेड ले रहे हो और आप कितना सही हो। जहा लोग बहुत कम समय में लाखो रूपया कमा लेते है वही कुछ लोग कम समय में लाखों रुपये का नुकसान भी कर लेते हैं।

अगर आप नए निवेशक हो तो आपको सबसे पहले Investing की तरफ जाना चाहिए। क्युकी अच्छा शेयर कम समय में नीचे भी आ सकता हैं। लेकिन लंबे समय में वो शेयर जरूर ऊपर जाएगा ही। आपको एसी शेयर में निवेश करना चाहिए जो शेयर भबिस्य में बढ़ने की पूरी संभावना रहती हैं।

आशा करता हु आपको Trading और Investment क्या हैं, दोनों में क्या अंतर है, कितने Types के होते है आपको अच्छी तरह से समझमे आ गया होगा । इससे जुड़ी कोई सवाल या सुझाब है तो कमेंट में जरुर बताए। शेयर मार्केट के बारे में बिस्तार से जानने के लिए आप हमारे और भी पोस्ट को पढ़ सकते हैं।

क्या शेयर बाजार में ट्रेडिंग बंद करने से बच जाएंगे रोज डूब रहे पैसे?

कोरोना का सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है. 18 मार्च को जब भारत का शेयर बाजार करीब 30,000 के नीचे आ गया तो ट्रीटर पर ट्रेंड करने लगा #bandkarobazar.

By: अविनाश राय, एबीपी न्यूज़ | Updated at : 18 Mar 2020 09:19 PM (IST)

पूरी दुनिया इस वक्त खौफजदा है. और इसकी वजह है एक वायरस कोविड 19. दुनिया भर में करीब 2 लाख लोग इस वायरस की चपेट में हैं. 8,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इसका सीधा असर दिख रहा है दुनिया के बाजार पर, जो लगातार गिरता जा रहा है. क्या अमेरिका, क्या चीन और क्या जापान, हर जगह मार्केट धराशायी होता जा रहा है. हम भी इससे अछूते नहीं हैं. 18 मार्च को अपने देश के शेयर बाजार का सेंसेक्स 30,000 से नीचे चला गया. और फिर ट्वीटर पर ट्रेंड करने लगा बंद करो बाजार. तो क्या सरकार बाजार को बंद कर सकती है और क्या बाजार के बंद होने से लगातार डूब रहे पैसे बच पाएंगे? करीब 40 लाख करोड़ रुपये का हुआ नुकसान भारत का शेयर बाजार हर रोज लगातार नीचे ही गिरता जा रहा है. पिछले एक महीने में बाजार में करीब 26 फीसदी की गिरावट हुई है, जिसकी वजह से निवेशकों को 40 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा का नुकसान हुआ है. और ये नुकसान लगातार बढ़ता ही जा रहा है. हर रोज हजारों करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है. हर रोज अखबारों, टीवी चैनलों और वेबसाइट्स की सुर्खियां बन रही हैं कि शेयर बाजार गिरने से कभी चार लाख करोड़ रुपये डूब गए तो कभी पांच लाख करोड़ और कभी 9 लाख करोड़. ये अलग-अलग दिनों के आंकड़े हैं. और अलग-अलग दिनों पर शेयर बाजार में ये पैसे डूबे हैं. इसी को देखते हुए जब 18 मार्च को शेयर बाजार 1300 पॉइंट से ज्यादा गिरा तो फिर लोगों ने #bandkarobazaar ट्वीट करना शुरू कर दिया और ये इंडिया का टॉप ट्रेंड बन गया. लेकिन क्या बाजार को बंद करना इतना आसान है, इसे समझने की कोशिश करते हैं. सर्किट ब्रेकर लगाकर संभाला गया था कामकाज

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शेयर बाजार में हफ्ते में पांच दिन काम होता है और दो दिन की छुट्टी होती है. शनिवार और रविवार. इसके अलावा बाजार बंद नहीं होता. हां अगर शेयर मार्केट में कुछ ज्यादा ही उथल-पुथल होती है तो पैसे को डूबने से रोकने के लिए कुछ तरीके अपनाए जाते हैं. इसे कहते हैं सर्किट ब्रेकर. जब ये लगता है कि कोई भी ब्रोकर शेयर बाजार को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है और उसकी वजह से अचानक से शेयरों की बिकवाली या खरीदारी तय सीमा से ज्यादा होने लगती है, तो इसे रोकने के लिए सर्किट ब्रेकर का इस्तेमाल किया जाता है. अभी हाल ही में जब 13 मार्च को बाजार अचानक से ओपनिंग के बाद 2534 अंक गिर गया तो सर्किट ब्रेकर लगाकर बाजार को 45 मिनट के लिए बंद कर दिया गया. ये सर्किट ब्रेकर भी दो तरह का होता है. अपर सर्किट और लोवर सर्किट. जब बाजार में पैसे ज्यादा हो जाते हैं तो अपर सर्किट लगाकर ट्रेडिंग कुछ देर के लिए रोक दी जाती है, वहीं जब बाजार में पैसे तय सीमा से कम हो जाते हैं तो लोअर सर्किट लगाकर ट्रेडिंग बंद की जाती है. 13 मार्च को लोअर सर्किट लगाकर ट्रेडिंग बंद की गई थी.

सर्किट ब्रेकर के लिए सेबी ने बनाई गाइडलाइंस सेबी की गाइडलाइन्स के मुताबिक अपर या लोअर सर्किट के क्या है ट्रेंड ट्रेडिंग लिए तीन ट्रिगर लिमिट्स हैं. 10 फीसदी, 15 फीसदी और 20 फीसदी. जब दोपहर 1 बजे से पहले शेयर बाजार 10 फीसदी तक गिरे या चढ़े तो ट्रेडिंग 45 मिनट के लिए रोक दी जाती है. अगर 1 बजे से 2.30 बजे तक बाजार में 10 फीसदी का उतार-चढ़ाव होता है तो ट्रेडिंग को 15 मिनट के लिए रोक दिया जाता है. वहीं अगर बाजार में दोपहर 1 बजे से पहले 15 फीसदी का उतार-चढ़ाव हो तो ट्रेडिंग 1 घंटे 45 मिनट के लिए रोकी जाती है. अगर एक बजे से दो बजे तक के बीच 15 फीसदी का उतार-चढ़ाव हो तो मार्केट में 45 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोक दी जाती है. अगर 2 बजे के बाद मार्केट में 15 फीसदी का उतार-चढ़ाव हो तो मार्केट को बंद कर दिया जाता है. अगर ट्रेडिंग के दौरान किसी भी वक्त शेयर बाजार में 20 फीसदी का उतार-चढ़ाव आता है तो बचे हुए पूरे दिन के लिए ट्रेडिंग बंद कर दी जाती है. सोशल मीडिया पर उठ रही बाजार बंद की मांग लेकिन कोई भी निवेशक ये नहीं चाहता कि सर्किट ब्रेकर लगाकर ट्रेडिंग बंद की जाए. और जब निवेशक सर्किट ब्रेकर नहीं चाहते तो वो पूरे बाजार की ट्रेडिंग ही रोकने के लिए कैसे राजी होंगे. हालांकि बाजार के कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिछले कुछ दिनों में पूरा मार्केट कैप 26 फीसदी तक कम हो गया है. ऐसे में और नुकसान न हो, इसके लिए ट्रेडिंग को रोकना ही सबसे बेहतर तरीका है. सेबी एक आदेश के जरिए अगले कुछ दिनों के लिए ट्रेडिंग बंद कर दे, तो मार्केट संभल सकता है. वहीं कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ट्रेडिंग कुछ दिनों के लिए बंद कर दी जाएगी तो बाजार जब भी खुलेगा क्रैश हो जाएगा. कुछ लोग इस बात के लिए भी तैयार हैं कि हर रोज पैसे डुबोने से तो बेहतर है कि एक ही दिन नुकसान उठाना पड़े. क्योंकि निवेशक शेयर का प्राइस कम होने पर शेयर खरीद ले रहे हैं. अगले दिन पता चलता है कि वो शेयर और भी ज्यादा गिर गया. ऐसे में उसे खासा नुकसान हो जा रहा है. वहीं सोशल मीडिया पर कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो ये कह रहे हैं कि बाजार बंद करने की बात वो लोग कर रहे हैं, जिन्होंने कभी भी शेयर बाजार से पैसे नहीं बनाए हैं. शेयर बाजार को बंद करवाने की वकालत करने वाले लोगों का ये भी कहना है कि अगर लोग कोरोना के कहर से बचेंगे, तो पैसे भी बना लेंगे. इसलिए सेबी को या तो बाजार बंद कर देना चाहिए या फिर ट्रेडिंग के घंटे कम कर देने चाहिए. हालांकि सोशल मीडिया के इस रिएक्शन पर सेबी का अभी तक कोई बयान नहीं आया है. बाकी शेयर बाजार बंद करने की वकालत करने वालों से एक सवाल है कि आप शेयर मार्केट में रोज का तो लेन-देन बंद कर सकते हैं, लेकिन वायदा कारोबार का क्या होगा. हालांकि हमारे सामने फिलिपिंस का उदाहरण भी है, जिसने अपने शेयर बाजार को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है. अमेरिकी सरकार अभी शेयर बाजार बंद करने पर राजी नहीं है और हमारे यहां तो इसपर सरकार की तरफ से कोई बात भी नहीं हो रही है.

Published at : 18 Mar 2020 09:06 PM (IST) हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Explainer News in Hindi

इंट्राडे ट्रेडिंग: यहां कुछ घंटों में मिल सकता है बंपर रिटर्न, लेकिन ध्यान रखें ये 5 टिप्स

Tips For Intra Day Trading: बाजार में एक ही ट्रेडिंग डे पर शेयर खरीदने और बेचने को इंट्रा डे ट्रेडिंग कहते हैं.

इंट्राडे ट्रेडिंग: यहां कुछ घंटों में मिल सकता है बंपर रिटर्न, लेकिन ध्यान रखें ये 5 टिप्स

Tips For Intra Day Trading: बाजार में एक ही ट्रेडिंग डे पर शेयर खरीदने और बेचने को इंट्रा डे ट्रेडिंग कहते हैं.

Tips For Intra Day Trading: शेयर बाजार ऐसी जगह है, जहां 1 दिन के कारोबार में भी अच्छा खासा मुनाफा कमाया जा सकता है. अगर आप सही और सटीक शेयर चुन लेते हैं तो इंट्राउे ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा कमा सकते हैं. बाजार में एक ही ट्रेडिंग डे पर शेयर खरीदने और बेचने को इंट्रा डे ट्रेडिंग कहते हैं. यहां शेयर खरीदा तो जाता है लेकिन उसका मकसद निवेश करना नहीं, बल्कि एक दिन में उसमें होने वाली बढ़त से मुनाफा कमाना होता है. हालांकि यह ध्यान रखने वाली बात है कि यहां जरूरी नहीं है कि हमेशा निवेशकों को फायदा ही हो.

अगर शेयर बाजार में डे-ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो इसके लिए पहले आपको डीमैट अकाउंट और एक ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाना होता है. इस अकाउंट में आप या तो ब्रोकर को फोन पर ऑर्डर देकर शेयर का कारोबार कर सकते हैं या ऑनलाइन भी खुद से ट्रेडिंग कर सकते हैं. इंट्रा डे में किसी शेयर में आप जितना चाहे पैसा लगा सकते हैं. इसके लिए किसी मिनिमम र​कम की जरूरत नहीं पड़ती है.

कैसे चुनें सही स्टॉक

  • सिर्फ लिक्विड स्टॉक में ट्रेडिंग करनी चाहिए और इंट्राउे के लिए ऐसे 2 से 3 स्टॉक का ही चुनाव करना चाहिए.
  • एक्सपर्ट वोलेटाइल स्टॉक से दूर रहने की सलाह देते हैं.
  • किसी भी शेयर का चुनाव करने के पहले निवेशकों को देखना चाहिए कि बाजार का ट्रेंड क्या है. उसी ट्रेंड को फॉलो करें, ना कि ट्रेंड के खिलाफ ट्रेडिंग करें.
  • शेयर का चुनाव करने के पहले उसे लेकर अच्छे से रिसर्च कर लें. शेयर को लेकर एक्सपर्ट की क्या राय है, इसे भी देख लें. जरूरत पर एक्सपर्ट की सलाह भी लें.
  • क्या है ट्रेंड ट्रेडिंग क्या है ट्रेंड ट्रेडिंग
  • शेयर में पैसा लगाने के पहले उसका लक्ष्य और स्टॉप लॉस तय करें. लक्ष्य पूरा होते दिखे तो मुनाफा वसूली कर लें.

एक दिनी तेजी का उदाहरण

कई बार शेयर बाजार में इंट्राडे के दौरान शेयरों में बंपर तेजी देखने को मिलती है. कईबार शेयर में 20 फीसदी तक का अपर सर्किट देखने को मिलता है. 5 से 10 फीसदी की भ्ज्ञी तेजी संभव है. आज यानी 12 मई के कारोबार में देखें तो टाटा मोटर्स, पावरग्रिड और एनटीपीसी जैसे शेयरों में 3 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली है.

Stocks in News: Maruti, Airtel, Vedanta, NTPC जैसे शेयरों में रहेगी हलचल, इंट्राडे में रख सकते हैं नजर

DCX Systems: 500 करोड़ का IPO खुला, ग्रे मार्केट में क्रेज हाई, क्‍या मुनाफे के लिए करना चाहिए निवेश?

Mcap of Top 10 Firms: टॉप 10 में से 9 कंपनियों का मार्केट कैप 90,319 करोड़ बढ़ा, Reliance Industries को सबसे ज्यादा फायदा

(Discliamer: हम यहां अलग अलग ब्रोकरेज हाउस की वेबसाइट या एक्सपर्ट द्वारा दी जाने वाली सलाह के बाद इंट्राडे कारोबार के बारे में जानकारी दी है. यह निवेश की सलाह नहीं है. शेयर बाजार के अपने जोखिम होते हैं, इसलिए निवेश के पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.)

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शेयर मार्केट से कितना अलग है कमोडिटी मार्केट, जानिए कैसे होती है कमोडिटी ट्रेडिंग?

शेयर बाजार ने भी निवेशकों को निराश नहीं किया. तेजी से दौरान निवेशकों को बंपर मुनाफा मिला. लेकिन यूरोप में यूद्ध के माहौल से सुरक्षित निवेश की मांग तेजी से बढ़ी है. क्योंकि शेयर बाजार में कमजोरी का ट्रेंड है.

कोरोना महामारी के बाद शेयर मार्केट में निवेशकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़त देखने को मिली है. इसी साल अगस्त में डीमैट खातों की संख्या पहली बार 10 करोड़ के पार पहुंच गई. हालांकि, शेयर बाजार ने भी निवेशकों को निराश नहीं किया. तेजी से दौरान निवेशकों को बंपर मुनाफा मिला. लेकिन यूरोप में यूद्ध के माहौल से सुरक्षित निवेश की मांग तेजी से बढ़ी है. क्योंकि शेयर बाजार में कमजोरी का ट्रेंड है. ऐसे में कमोडिटी मार्केट में सोने और चांदी की मांग तेजी देखने को मिली है. क्या आपको पता है कि कमोडिटी मार्केट क्या है और यह इक्विटी यानी शेयर मार्केट से कितना अलग है.

कमोडिटी मार्केट क्या है?

कमोडिटी मार्केट (Commodity Market) यह एक ऐसा मार्केटप्लेस है जहां निवेशक मसाले, कीमती मेटल्स, बेस मेटल्स, एनर्जी, कच्चे तेल जैसी कई कमोडिटीज की ट्रेडिंग करते हैं.

भारत में दो तरह की कमोडिटीज में ट्रेडिंग होती है…

  • एग्री या सॉफ्ट कमोडिटीज में मसाले जैसे काली मिर्च, धनिया, इलायची, जीरा, हल्दी और लाल मिर्च हैं. इसके अलावा सोया बीज, मेंथा ऑयल, गेहूं, चना भी इसी का हिस्सा हैं.
  • नॉन-एग्री या हार्ड कमोडिटीज में सोना, चांदी, कॉपर, जिंक, निकल, लेड, एन्युमिनियम, क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस शामिल हैं.

इक्विटी मार्केट और कमोडिटी मार्केट में क्या अंतर है?

  • इक्विटी मार्केट में लिस्टेड कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं. वहीं कमोडिटी मार्केट में कच्चे माल को बेचा और खरीदा जाता है.
  • इक्विटी के होल्डर को शेयरहोल्डर कहा जाता है, जबकि कमोडिटी के होल्डर क्या है ट्रेंड ट्रेडिंग को ऑप्शन कहा जाता है.
  • शेयरहोल्डर को पार्शियल कंपनी का मालिक माना जाता है, लेकिन कमोडिटी मालिकों को नहीं.
  • इक्विटी शेयरों की समाप्ति तिथि नहीं होती है. जबकि कमोडिटी में ऐसा नहीं होता है.
  • इक्विटी मार्केट में शेयरहोल्डर डिविडेंड के योग्य माना जाता है. वहीं कमोडिटी मार्केट में डिविडेंड का प्रावधान नहीं होता.

भारत में प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज

भारत में कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए प्रमुख एक्सचेंज हैं. इसमें मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX), नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) के साथ-साथ यूनिवर्सल कमोडिटी एक्सचेंज (UCX), नेशनल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (NMCE), इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज (ICEX), ACE डेरिवेटिव्स एंड कमोडिटी एक्सचेंज लिमिटेड शामिल हैं.

कमोडिटी मार्केट में ट्रेडिंग कैसे होती है?

कमोडिटी में ट्रेडिंग शुरू करने के लिए डीमैट अकाउंट की आवश्यकता होगी. डीमैट अकाउंट आपके सभी ट्रेड और होल्डिंग के सिक्योर करेगा, लेकिन एक्सचेंज पर ऑर्डर देने के लिए आपको ब्रोकर के माध्यम से जाना होगा.

Chapter 4- Share Market Trend क्या हैं – Uptrend, Downtrend & Sideways Trend की जानकारी

हमने पिछले चैप्टर में ये सीखा था की शेयर मार्केट में शेयर के प्राइस कम-ज्यादा डिमांड और सप्लाई के वजेसे होते है। यही डिमांड और सप्लाई चार्ट पर कुछ ट्रेंड बनाते है, जो हमे बताता है की प्राइस ऊपर जा रही है, निचे जा रही है या एक ही जगह पर है, जिन्हे देखकर- समझकर हम अच्छेसे ट्रेडिंग कर सकते है, और ट्रेंड के स्ट्रक्चर को सीखने के बाद हमे दूसरे कोई इंडिकेटर की आवश्यकता नहीं हे जो हमे बताये की कोनसा ट्रेंड चल रहा है। एक सफल ट्रेडर बनने के लिए हमे ये सीखना बहुत जरुरी है और सीखने के बाद यही ट्रेंड हमे बताएँगे की, अभी कोनसा ट्रेंड चल रहा हे, पिछला ट्रेंड ख़तम हुवा या नहीं, नया ट्रेंड चालू हुवा या नहीं ।

ट्रेंड के प्रकार (Type क्या है ट्रेंड ट्रेडिंग of Trends)

शेयर मार्केट में ट्रेंड के मुख्य 3 प्रकार होते है। जो हमे बताता है की प्राइस ऊपर जा रही है, निचे जा रही है या एक ही जगह पर है। 1. Uptrend(अपट्रेंड) 2. Downtrend (डाउन ट्रेंड ) 3. Sideways Trend

  • जब कीमत बढ़ रही होती है, तो इसे अपट्रेंड(Uptrend ) कहा जाता है।
  • जब कीमत नीचे जा रही हो, तो इसे डाउनट्रेंड (Downtrend) कहा जाता है।
  • जब कीमत अगल-बग़ल में बढ़ रही हो, तो इसे साइड वेज़ (Sideways Trend) कहा जाता है.

ऊपर दिए गए ट्रेंड के 3 प्रकार हमे अलग-अलग कहानी बताते है। जो हमे बताते है की, मार्केट अपट्रेंड, डाउन ट्रेंड या साइडवेज़ ट्रेंड में है।

ये सारे ट्रेंड के प्रकार डॉव थ्योरी(Dow Theory) से लिए गए है। लेकिन मैं इसे यहां आपको संक्षेप में समझाऊंगा।

ट्रेंड का डॉव सिद्धांत ( The Dow theory of Trends)

सरल शब्दों में सिद्धांत कहता है कि:

  1. जब प्राइस अपट्रेंड में होती है, तब वो बढ़ने वाले Higher High और Higher Low बनाते हुए ऊपर जाती है। और जब ये पैटर्न खंडित होता हे, तब हमे हे समज आता है की अपट्रेंड अब ख़तम हो गया है और ये एक डाउन ट्रेंड की सुरुवात होना का संकेत है।
  2. इसी तरह जब प्राइस डाउन ट्रेंड में होती है, तब वो बढ़ने वाले Lower High और Lower Low बनाते हुए निचे जाती है। और जब ये पैटर्न खंडित होता हे, तब हमे हे समज आता है की डाउन ट्रेंड अब ख़तम हो गया है और ये एक अपट्रेंड की सुरुवात होना का संकेत है।

अपट्रेंड की संरचना (Structure of an Uptrend)

जैसे मैंने ऊपर बताया हे की प्राइस जब अपट्रेंड में होती है , तो वो Higher High (HH) और Higher Low (HL) बनती है। ये आप निचे दिए गए पिक्चर को देख कर समझ सकते है।

अपट्रेंड की संरचना (Structure of an Uptrend)

डाउन ट्रेंड की संरचना (Structure of an Downtrend)

और प्राइस जब डाउन ट्रेंड में होती है , तो वो Lower High (LH) और Lower Low (LL) बनती है। ये आप निचे दिए गए पिक्चर को देख कर समझ सकते है।

डाउन ट्रेंड की संरचना (Structure of an Downtrend)

आपने ऊपर अपट्रेंड और डाउन ट्रेंड के स्ट्रक्चर देखे है, पर ये बहुत आइडियल(Ideal) चार्ट है प्रक्टिकली चार्ट कैसा दिखता है। ये आप निचे दिए हुए पिक्चर को देखकर समज सकते है ।

Practical Chart

ऊपर दिए गए चार्ट को देखकर हमे ये समज आता है की, प्राइस पहले डाउन ट्रेंड में चल रही थी, इसीलिए वो बार – बार LHLL बना रही थी । पर क्या है ट्रेंड ट्रेडिंग जब अगला लौ (Low) LL से बदल कर HL बन ज्याता है, तब हमे ये समज आता है की, अब पैटर्न बदल गया है, और डाउन ट्रेंड का अंत हो गया ये। और अब यहासे अपट्रेंड आ सकता hae.

साइड वेज़ ट्रेंड (Structure of Sideways Trend)

साइड वेज़ ट्रेंड में प्राइस 1 चैनल(channel) में फसी हुई होती है, प्राइस उसी चैनल में ऊपर निचे करती रहती है। निचे दिए गए पिक्चर को देखकर आप ये बहुत सरलता से समज सकते है। और प्राइस जब भी ये चैनल के सपोर्ट/रेजिस्टेंस या इसके ब्रेकऑउट लेवल पर आती है तब हमे बहुत अच्छे ट्रेड मिलते है। ये हम आगे आने वाले पोस्ट में देखेंगे।

साइड वेज़ ट्रेंड

ऊपर वाले चार्ट से हमे आइडियल (Ideal) चार्ट तो समज क्या है ट्रेंड ट्रेडिंग आ गया। तो चलो अब हम प्रैक्टिकल चार्ट देखते है। निचे दिए गए पिक्चर को देखकर आप ये बहुत सरलता से समज सकते है

Practical Sideways trend Chart

Summary

इस चैप्टर में हमने शेयर मार्केट के ट्रेंड सीखे। निचे दिए गए 1 पिक्चर को देखकर हम सभी ट्रेंड का रिविज़न चुटकियो में कर सकते है।

All 3 trends in single Picture

शेयर मार्केट में ट्रेंड के मुख्य 3 प्रकार होते है। 1. Uptrend(अपट्रेंड) 2. Downtrend (डाउन ट्रेंड ) 3. Sideways Trend

इस चैप्टर में हमने ट्रेंड के बारे में सीखा। इसे सिख कर, समज कर हम मार्केट का ट्रेंड को समज सकते है। और ट्रेंड के हिसाब से हमारा ट्रेड ले सकते है।

अगर मार्केट अपट्रेंड में हे, तो हमें Buy के ट्रेड लेने चाहिए। और अगर मार्केट डाउन ट्रेंड में हे तो हमे Sell के ट्रेड लेने चाहिए।

जब प्राइस अपट्रेंड में उसके Higher Low पर होती है तब कैंडलस्टिक का पैटर्न देखकर buy करना चाहिए।

जब प्राइस डाउन ट्रेंड में उसके Lower High पर होती है तब कैंडलस्टिक का पैटर्न देखकर Sell करना चाहिए।

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